सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बीएस 3 वाली गाड़ियों की बिक्री पर रोक लगा दी है. अदालत ने कहा है कि 1 अप्रैल 2017 से ऑटो कंपनियां बीएस 3 की गाड़ियां नहीं बेच पाएंगी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ऑटो कंपनियों की 8.2 लाख गाड़ियां बेकार हो जाएंगी.
क्या है बीएस 3?
बीएस के मायने एमिशन स्टैंडर्ड से है. बीएस यानी भारत स्टेज से पता चलता है कि आपकी गाड़ी कितना प्रदूषण फैलाती है.
बीएस के जरिए ही भारत सरकार गाड़ियों के इंजन से निकलने वाले धुएं से होने वाले प्रदूषण को रेगुलेट करती है.
बीएस मानक सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड तय करता है. देश में चलने वाली हर गाड़ियों के लिए बीएस का मानक जरूरी है.
विदेश में क्या है मानक?
यूरोप में इस तरह के मानक को यूरो कहते हैं. वहीं अमेरिका में ये मानक टीयर 1, टीयर 2 है.
बीएस 3 क्या है?
बीएस के साथ जो नंबर होता है उससे यह पता चलता है कि इंजन कितना प्रदूषण फैलाता है. यानी जितना बड़ा नंबर उतना कम प्रदूषण.
भारत में एनसीआर और कुछ दूसरे शहरों में बीएस 4 लागू है. वैसे देश भर में बीएस 3 लागू है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर?
सुप्रीम कोर्ट ने अब देश भर में बीएस 3 की गाड़ियों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है. यानी अब देश भर में बीएस 4 का नियम पूरी तरह लागू हो जाएगा.
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